Tuesday, August 22, 2017

ल प्रे क 04 : गाज़र का हलवा



"आंटी! पक्का मिल्क उतना ही मिलाना है न? ...थैंक यू"
"दो सालों में आजतक हमें तो कुछ नहीं खिलाया, उलटे ऑमलेट तक हम से बनवाती थी. " रूममेट डॉली नोट्स बनाते हुए बुदबुदाई.
"चुप कर चुड़ैल! अपनी नज़र मत लगा. ख़राब हुआ ना तो तेरे उस गिटारिस्ट को कह दूंगी कि तेरी एंजेल को भोजपुरी गाने पसंद हैं..." टिफ़िन खंगाल अपने दुपट्टे की नोक से पोछते हुए उसने धमकी का छोंका लगा दिया.
“अच्छा तो बनेगा ना? उसे ठीक नहीं लगा तो? मैं कह दूंगी कि जैसा भी हो तारीफ ही करना. लेकिन ये तो खाने की चीज़ है, मेरा चेहरा थोड़े है कि झूठी तारीफ कर पायेगा? जैसे ही मुंह में रखेगा चेहरे के भाव बता देंगे असलियत. देखूंगी ही नहीं मैं उसकी तरफ. और 7 बजे तो गर्ल्स हॉस्टल के पास वैसे भी अँधेरा हो जाता है, दिखेगा ही नहीं उसका चेहरा. लेकिन उसे तो पता है न कि मुझे मैगी के अलावा कुछ भी बनाना नहीं आता! कम से कम मेरे एफोर्ट्स की तो तारीफ करेगा ना? कह दूंगी कि सच बता दे, मुझे बिलकुल बुरा नहीं लगेगा....” अपनी कॉपी का आखिरी पेज फाड़ा, जिसपे ढेर सारे फेक सिग्नेचर और love टेस्ट किये हुए थे. टिफ़िन को अच्छी तरह लपेट कर पॉलि-बैग में रखा. एक चम्मच उसने इस बैग में रखा और एक चम्मच अपनी जेब में छुपाकर.
“अगर वो आया ही नहीं तो? कुछ काम पड़ गया उसे तो? मेरा सरप्राइज का प्लान? और फिर ये डॉली- बहुत मजाक उड़ाएगी मेरा! मैं फेंक दूंगी उधर ही, या अकेले बैठ के खा लुंगी. अगर देर से आया तो? ख़राब तो नहीं न हो जाएगा टेस्ट? उसकी किस्मत, मैं क्यों मरुँ ये सोच सोच कर.” हड़बड़ी में पानी का बोतल छोड़ वह हॉस्टल-गेट की तरफ भागी. पहली बार वो टाइम से पहले पहुँचने वाली थी.
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